आधुनिक काल की परिभाषा।

हिंदी साहित्य का आधुनिक काल की परिभाषा।


हिंदी साहित्य का आधुनिक काल आधुनिक ( Modern )इसलिए है। क्योंकि भारत में ब्रिटिशों की नई शासन पद्धति आई और ब्रिटिशों  के द्वारा नए साधनों संस्थाओं का विकास हुआ। इन नए साधनों में डाक, रेल आदि है। तो संस्थाओं में स्कूल-कॉलेज आदि।



 परिणामत: देश में जागरण का दौर आया साहित्य में भी कविता राज दरबार की कामिनी से निकलकर जनता के सुख-दुख से जुड़ी और साहित्य केंद्र में सामान्य मनुष्य आया। सामान्य मनुष्य के ठेठ सामान्य भाषा खड़ीबोली भी आयी।

कविता की प्रकृति और भाषा दोनों ने नया रूप पाकर ग्रहण किया काव्य के स्थान पर  गद्य  क्रांतिकारी रहा क्योंकि बाद में काव्य की भाषा गद्य का रूप धारण कर दी गई आदिकाल भक्तिकाल एवं रीतिकाल में हिंदी की बोली भाषाओं का साहित्य हिंदी का साहित्य कहा गया परंतु आधुनिक काल में विशुद्ध खड़ी बोली साहित्य की भाषा बन गई।



आमिर खुसरो तथा कबीर की कविता से निकलकर खड़ी बोली अंग्रेज अधिकारी ईसाई धर्म प्रचारक तथा आधुनिक प्रेस में पहुंची।सन 18 सो इश्वी में कोलकाता के फोर्ट विलियम कॉलेज की स्थापना के बाद उर्दू और हिंदी को विकसित होने का अवसर प्राप्त हुआ डॉ जॉन गिलक्रिस्ट ने भारत में प्रशासन चलाने के लिए आने वाले ब्रिटिश अधिकारियों को हिंदी पढ़ाना शुरू किया। 

इसी कॉलेज से उन्होंने हिंदी पढ़ाने हेतु दो हिंदी अध्यापकों को नियुक्त किया लल्लू लाल और सदल मिश्र। इनके अतिरिक्त खड़ी बोली गद्य को विकसित करने में मुंशी सदा सुकलाल नियाज तथा इंशा अल्लाह खा का योगदान उल्लेखनीय है।





इंशा अल्लाह खां की रानी केतकी कहानी प्रथम हिंदी कहानी है।
जो मौलिक एवं आदर्श कहानी है ईसाई प्रचार ओने अपने धर्म प्रचार हेतु बाइबल का अनुवाद हिंदी में किया। इनके द्वारा प्रेस की स्थापना हो चुकी थी इसी का लाभ लेते हुए राजा राम मोहन रॉय ने बंगदूत पंडित जुगल किशोर शुक्ल ने उदंत मार्तण्ड जो हिंदी का प्रथम समाचार पत्र भी है। को चलाया
अंग्रेजों की दमनकारी नीतियों के विरुद्ध इनका उपयोग करते हुए प्रथम स्वतंत्रा आंदोलन भी चलाया गया। 

अंग्रेजों की स्वार्थी शोषण परक नीतियों को उजाड़ कर बुद्धिजीवियों ने सामान्य जनता को जगाया। लोगों में असंतोष विद्रोह का भाव पनपने लगा और लोग एवं बुद्धिजीवी प्राचीन भारत का गौरव गान करते हुए देश की वर्तमान शासन व्यवस्था को समझकर स्वतंत्रा अधिकार और स्वशासन की मांग करने लगे।




पश्चिम के संपर्क में आने के बाद सामाजिक मूल्य रूढ़ियां जड़ परंपरा अंधश्रद्धा अंधविश्वास आदि में परिवर्तन की दृष्टि विकसित होने लगी स्त्री शिक्षा विधवा विवाह का समर्थन होने लगा तो बाल विवाह सती प्रथा जाति प्रथा का विरोध कर स्वातंत्र्य बंधुता समता व भाईचारा के मूल्यों को समाज में विकसित किया जाने लगा।




परिणाम अनेक सामाजिक आंदोलन उभरकर आये पूंजीवादी सामंतवादी तथा विषमतामुल्क व्यवस्था को निकालकर लोकतांत्रिक एवं शमाता मुल्क व्यवस्था को लाने के लिए समाज सुधारो को द्वारा प्रयास किए गये । आर्य समाज का एकेशवरवाद और छुआछूत विरोध सुधार की भावना से ही उपजे हैं।

यह स्पष्ट है कि भारत एक नई अंगड़ाई ले रहा था सामाजिक धार्मिक आर्थिक राजनीतिक दृष्टि से। शोषण एवं वर्चस्व की व्यवस्था को उखाड़ कर गतिशील एवं जनहितकारी व्यवस्था को लाना श्रेयस्कर ही रहा है।


इस दृष्टि से आधुनिकता ने भारत देश के अंग अंग को जज कोरा और उसका नव निर्माण किया। प्रत्यक्ष परोक्ष रूप में ब्रिटिश शासन व्यवस्था ईसाई धर्म प्रचार इसके कारक बने है।





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