हिंदी साहित्य-हिंदी कहानी का विकास ( प्रेमचन्दोतर युग:कहानी )

प्रेमचन्दोतर युग:

प्रेमचन्द के बाद के युग के कहानीकार पश्चिम के दो चिन्तको, का्ल माक्क्स तथा फ्राइड से विशेष रूप से प्रभावित हुए। इस युग की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि कहानी के पात्र किसी वर्ग विशेष का प्रतिनिधित्व नहीं करते हैं। ये व्यक्ति के रूप में किसी न किसी मनोवैज्ञानिक समस्या से व्रस्त एवं मस्त दिखाई देते हैं। इस प्रकार की कहानी लिखने वालों में प्रमुख नाम है- 
जैनेन्द कुमार, रांगेय राधव, अज्ञेय तथा इलाचन्द जोशी। वैसे ये कहानीकार अपनी पूर्ववर्ती प्रसाद प्रेमचन्द्र परम्परा से भी सम्बद्ध दिखाई देते है। इस युग में दूसरे प्रकार के वे कहानीकार है।

जिन्होने प्रेमचन्द परम्परा को गतिमान किया। इस सम्बन्ध में विशेष उल्लेखनीय नाम है -
यशपाल, उपेन्द्र नाथ 'अश्क', चन्द्रगुप्त विद्यालंकार, विष्णू प्रभाकर, अमृतलाल नागर, भगवती चरण वर्मा, वृन्दायन लाल वर्मा आदि।


समाजवादी दृष्टिकोन से प्रभावित हिन्दी के अनेक कहानीकारों ने सामाजिक विसंगतियों को यथधार्थपरक शैली में प्रस्तुत किया है। जैनेन्द्र एवं अझेय का अधिक ध्यान सूक्ष्म चित्रवृत्तियों पर केन्द्रित था, जबकि समाजवादी लेखकों ने स्पष्ट रूप से समस्याओं का उद्घाटन किया है। 


माक्क्सबादी समाजयादी यशपाल ने अठारह कहानी संग्रह हिन्दी जगत् को दिये। यशपाल के लिए कहानी 'केवल मनोसंजक घटनाचक्र या विवतण नहीं है" अपितु विचार की पुष्टि के लिए चूना एवं युना गया दृष्न्त है। यशपाल के पात्र, खूटो पर टेंगे हुए सत्य है। कुछ कहानियाँ ऐसी भी है


जिनके पात्र लेखक पर हावी हो गये और उसके नियन्त्रण से बाहर हो जीवन की सीधी-सभी युना गया दृष्न्त है। यशपाल के पात्र, खूटो पर टेंगे हुए सत्य है। कुछ कहानियाँ ऐसी भी है बात कहते हैं। यशमाल एक क्रान्तिकारी प्रगियादी लेखक थे। लेखन उनके लिए आजीविका का साधन भी था और क्रान्ति का याहक भी। उन्होॉंने समाज की गली-सहो मान्यताओं पर बड़े
तीखे प्रहार किए।


 पिंजरे की उड़ान, यो दुनिया, तर्क का तुफान, फूलों का कुनता, उत्तमी की माँ आदि इनके प्रसिद्ध कहानी-संग्रह है। यशमाल की कहानियोँ उद्देश्यपरक, साफ-सुधरी और सशक्त है। मफ्रील उत्तराधिकारी, चित्र का शीर्षक, प्रतिष्ठा का बोझ, एक प्याला, तुफान का देत्य आदि इनको बहुपर्थित कहानियों है।

चन्द्रगुप्त विद्यालंकार को कहानियाँ मे सामाजिक सरोकारों का बित्रण प्रभावी ढंग से हुआ है। चन्द्रकान्ता, भय का राज्य, अमावस आदि इनके उल्लेखनीय कहानी-संग्रह है। विद्यालंकार की बाद की काहानियों प्रतीकामक है, जबकि पहली कहानियां प्रेमधन्द्र परम्परा का की बाद की काहानियों प्रतीकामक है, जबकि पहली कहानियां प्रेमधन्द्र परम्परा का
अनुसरण करती है।


उपेन्द्रनाथ अश्क के अनेक कहानी संग्रह प्रकाशित हुए है, जिनमें ये मध्यव्गीय समस्याओं को उाते हुए स्थितियों पर व्य करतो चलते हैं। इससे रनाओं की प्रासंगिकता एवं पाठकीय रुचि उनके साथ जुड़ जाती है। डाची, आकाशवाणी, काकढा का तेली इनकी बहुचर्चित कहानियाँ है।



माव्सवादी विचारधारा से प्रभावित इस परण्परा के अन्य लेखको में रांगेग राधय, अमृत राय, मनमयनाक गुत, भेरत प्रसाद गुत के नाम अग्गण्य है। रांगेय रापव की कहानी 'गदल' एक अविस्मरणीय रचना है, जो एक गूजर स्ती के पुरुष व्यक्तित्व एवं स्नेहिल जीवन की स्वच्छ घारा को रेखांकित करती है।


स्वतन्त्रतापूर्व रचनाकारों में बहुत-से ऐसे कहानीकार भी है, जो माक्क्सवादी नहीं है अधितु, सदाशय वृत्तियों का प्रतिपादन करते हैं। भगवतीचरण वर्मा ऐसे ही कहानीकार है। इनकी कहानियाँ इतिवृत्तात्यक शैली की है। 'प्रायश्चित' इनकी सरवाधिक प्रसिद्ध कहानी है। गांधीवादी साहित्यकार विष्णू प्रभाकर की कहानियाँ सामाजिक सत्य को उद्घाटित करनेवाली
उद्देश्यपरक कहानियाँ है। आम आदमी का दर् इनकी कहानियों में एकाएक साकार हो उठता है। धरती अब भी धून रही है, गृहस्थी, रहमान का बेटा, ठेका, जज का फैसला इनकी चर्चित कहानियोँ है।


द्रिजेन्द्रनाथ निर्गुण की कहानियाँ भावुक यथार्थ की रनाएँ हैं। राधाकृष्ण की कहानियाँ व्यंन्य के तीखेपन के लिए ज्ञात हैं। रामलीला' ऐसी ही कहानी है।

महिला लेखकों में सुभद्राकुमारी चौहान की कहानियाँ सामाजिक यथार्थ की कहानियाँ है।
इनके प्रमुख कहानी-संग्रह-है-बिखरे मोती और उन्मादिनी। नारी की समस्याएँ तथा भारतीय सन्दर्भ इनकी कहानियों में एकाएक मुखरित हो उठते है। इनकी 'पापी पेट' कहानी बहुचर्चित रही है।

 शिवरानी देवी की कहानियाँ 'कौमुदी' में संकलित है, जो उनके पति प्रेमचन्द्र की परम्परा का अनुसरण करती है उषादेवी मिश्रा की कहानियाँ भावुकतापूर्ण है। मिश्र कहाँ, गोधुलि, मन का मोह आदि इनकी प्रसिद्ध रचनाएँ है।

द्वितीय चरण में और भी कतिपय कहानिकार रहे है परन्तु अधिकांश ने प्राय: कहानी के उस स्वरूप को ही अपनाया है जो प्रेमचन्द्र, जैनेन्द्र अथवा अज्ञेय ने प्रसारित किया। सूर्यकान्त त्रिपाठी निराला की कहानियाँ वस्तुत: एक कवि हृदय की कहानियाँ है।

इस युग के अन्य उल्लेखनीय कहानीकार है, उमा नेहरु, शिवरानी देवी, उषादेवी मिश्रा,कमलादेवी चौधरी, शिवनाथ शर्मा, कृष्णदेव प्रसाद, गोरे बेडब बनारसी, अन्नपूर्णानन्द, अजीम बेग चूगताई, मोहन राकेश आदि।






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