दीपावली पर हिंदी निबंध

दीपावती का वर्ष

भारतवर्ष में विभिन्न अवसरों पर जीवन को सुखी, सम्पन्न, प्रसन्न करने वाले त्योहारों का धूमधाम से सामाजिक, धार्मिक और सांस्कृतिक महत्त्व है। दीपावली का पर्व सारे भारतवर्ष में मनाया जाता है।


दीपों का त्योहार दीपावली आश्विन मास के कृष्णपक्ष की त्रयोदरशी से कार्तिक मास के शुक्लपक्ष की द्वितीया तक बड़े उत्साह से लोग मनाते हैं। इस दिन श्रीराम लंका के राजा रावण का वध कर अपनी पत्नी सीता, भाई लक्ष्मण और हनुमान सहित अयोध्या लौटे। अयोध्यावासियों ने घर-घर दीप
जलाकर उनके आगमन पर आनन्द और उल्लास मनाया था।

गोवा में लोग यह मानते है कि इस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने राक्षस राज नरकासुर का वध कर उसकी कैद से अनेक राजा और सोलह हजार राजकन्याओं को रिहा किया था। गोवा में हर जगह लोग नरकासुर की महाकाय प्रतिमा बनाते हैं और फिर ताशे, ढ़ोल बजाते कहीं कहीं जुलूस निकालतेहैं। फिर पी फटने से कुछ समय पहले श्रीकृष्ण द्वारा अग्निबाण छोड़कर नरकासुर जलाया जाताहै। पटाखे, बम आदि आतिशबाजियों का धूमधड़ाका होता है। फिर सब अपने घर लौटते हैं. भगवान करते हैं, बड़े-बुढ़ों के चरण छूकर आशीर्वाद लेते हैं। बाद में फलाहार कर मंदिरों में करते हैं, की पूजा महालक्ष्मी का दर्शन करने जाते हैं लोग अपने-अपने घरों की छतों, दीवारों, द्वारों पर दीपों को जलाते हैं।



 लोग अपने मित्रों, सगे-संबंधियों में बधाइयाँ, मिष्ठान्न, फलों, मेवों का आदान-प्रदान करते हैं। दिवाली के दूसरे दिन विक्रम का नया वर्ष शुरू होता है। दीपावली के शुभ पर्व पर लक्ष्मी पूजन का विशेष महत्त्व है। व्यापारी वर्ग अपने नये वर्ष का प्रारम्भ दीपावली से ही मनाते हैं। वे अपने बही खाते इसी दिन से शुरू करते हैं । फिर भैयादूज के दिन बहन भाई की आरती उतारती है. टीका लगाती है और मिष्टान्न खिलाती है भाई बहन को भेंट (उपहार) देता है। गोआ में तुलसी विवाह भी बड़ी धूमधाम से मनाते हैं।

दीपावली का पर्व हमारे सामने आदर्श की भावना लेकर आता है। दीपों के पवित्र आलोक से हमारा जीवन पवित्र और आलोकित हो उठता है गम का अँधेरा हटता है। दीपावली के दिनों में कुछ लोग जुआ खेलते हैं इससे कई लोग बरबाद भी हो जाते हैं यह कुप्रथा बंद होनी चाहिए।

दीपावली त्योहार हमें जीवन में ऊँचा उठने की प्रेरणा देता है। समाज में प्रेम और सद्भावन फैलाता है। यह एक पुण्य-पर्व है।


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