ऐ मेरे वतन के लोगों - हिंदी कविता


ऐ मेरे वतन के लोगो! तुम खूब लगा लो नारा!
ये शुभदिन है हम सबका लहरा लो तिरंगा प्यारा
पर मत भूलो सीमा पर ! वीरों ने है प्राण गँवाए!
कुछ याद उन्हें भी कर लो-2! जो लौट के घर ना आए-2
ऐ मेरे वतन के लोगो! ज़रा आँख में भर लो पानी!
जो शहीद हुए हैं उनकी! ज़रा याद करो कुरबानी!
जब देश में थी दीवाली! वो खेल रहे थे होली!

जब हम बैठे थे घरों में! वो झेल रहे थे गोली
संगीन पे धर कर माथा! सो गये अमर बलिदानी !
जो शहीद हुए हैं उनकी! ज़रा याद करो कुरबानी ॥ 1॥

जब घायल हुआ हिमालय! खतरे में पड़ी आज़ादी!
जब तक थी साँस लड़े वो! फिर अपनी लाश बिछादी
जो खून गिरा पर्वत पर ! वो खून था हिन्दुस्तानी!
जो शहीद हुए हैं उनकी! ज़रा याद करो कुरबानी ॥ 2 ॥

कोई सिख कोई जाट मराठा-2! कोई गुरखा कोई मदरासी-2।
सरहद पे मरनेवाला! हर वीर था भारतवासी
थे धन्य जवान वो अपने ! थी धन्य वो उनकी जवानी!
जो शहीद हुए हैं उमकी! ज़रा याद करो कुरबानी ॥ 3 ॥

थी खून से लथपथ काया, फिर भी बंदूक उठाकर,
एक-एक ने दस को मारा, फिर गिर गए होश गँवाकर,
जब अंत समय आया तो, कह गए कि अब मरते हैं,
खुश रहना देश के प्यारों-2, अब हम तो सफर करते हैं।
क्या लोग थे वो दीवाने, क्या लोग थे वो अभिमानी,
जो शहीद हुए हैं उनकी! ज़रा याद करो कुरबानी।

जय हिंद, जय हिंद की सेना,
जय हिंद, जय हिंद की सेना।
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